नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य के खिलाफ केवल अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत अपराध नहीं हो सकता है और कानून केवल तभी लागू किया जा सकता है जब आरोप “जाति के नाम पर” दुर्व्यवहार का हो और वह भी जनता की नज़र में हो।एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(एस) की व्याख्या करते हुए जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि कानून के तहत किसी अपराध के लिए केवल एससी/एसटी के सदस्य को गाली देना पर्याप्त नहीं होगा और साथ ही जाति का नाम बताना भी अपराध नहीं होगा।“…आरोपों से यह अवश्य उजागर होना चाहिए कि गालियाँ जाति के नाम से संबंधित थीं, या कि जाति के नाम को एक गाली माना गया था। उपरोक्त से जो निष्कर्ष निकलता है वह यह है कि धारा 3(1)(s) में अपमान का तत्व भी मौजूद है। इसका अनुमान जाति के जानबूझकर अपमान और सामग्री से लगाया जाना चाहिए।”
सिर्फ अपशब्द, SC/ST एक्ट का उल्लंघन नहीं: SC | भारत समाचार