नई दिल्ली: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि विश्व मंच पर भारत का उदय “निश्चित” है, लेकिन दुनिया को एक सार्थक विकास मॉडल पेश करने के लिए मानवीय जिम्मेदारी से निर्देशित होना चाहिए। तिरूपति में भारतीय विज्ञान सम्मेलन 2025 में बोलते हुए उन्होंने कहा कि पश्चिमी विकास भौतिक समृद्धि के साथ-साथ सामाजिक और पारिस्थितिक संकट भी लेकर आया है। भागवत ने इस बात पर जोर दिया कि विकास का उद्देश्य सुख है, न कि केवल भौतिक संतुष्टि, असमानता से प्रेरित विकास के खिलाफ चेतावनी। आरएसएस प्रमुख ने कहा, भारत की प्रगति संतुलन, संयम और धर्म पर आधारित होनी चाहिए।